Thursday, May 05, 2011

suffer sorrows and pain

There is no more a happy person than a Sadhak in this world. A common person is ignorant. Ignorance leads to egotism. Egotism generates fear. Fear leads to confusion. Confusion is there because man has many wishes. And most wishes are there because man desires pleasure. It is due to indulgence in pleasures that a person develops traits. It is due to these traits that a person has to take birth again and again and has to suffer sorrows and pain.

1 comment:

  1. मेरा अंतर तिमिर मिटाओ, सतगुरु ज्योत से ज्योत जलाओ
    हे योगेश्वर, हे परमेश्वर, निज कृपा दृष्टि बरसाओ
    सतगुरु ज्योत से ज्योत जलाओ
    हम बालक तेरे द्वार पे आये, मंगल दरश कराओ
    सतगुरु ज्योत से ज्योत जलाओ
    अंतर में युग युग से सोई चित्त-शक्ति को जगाओ
    सतगुरु ज्योत से ज्योत जलाओ
    सांची ज्योत जगे हृदय में सोहम नाद जगाओ
    सतगुरु ज्योत से ज्योत जलाओ
    शीश झुकाये करें तेरी आरती, प्रेम सुधा बरसाओ
    सतगुरु ज्योत से ज्योत जलाओ
    जीवन में श्री राम अविनाशी, चरनन शरण लगाओ
    सतगुरु ज्योत से ज्योत जलाओ

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